आज इस पोस्ट में कक्षा 11 हिन्दी साहित्य में 'कबीर' पाठ का परिचय के साथ उनके पदों की सप्रसंग व्याख्या , प्रश्न उत्तर बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे । वर्तमान परीक्षा के प्रश्न पत्र को ध्यान में रखते हुए आज उक्त बिन्दुओं के साथ भाव और कला सौंदर्य के बारें में भी नोट्स के रूप में जानेंगे ।
कबीरदास जी का जीवन परिचय -
जन्म और स्थान -संत कबीरदास का जन्म सन 1398 में काशी में हुआ था।
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कक्षा 11 हिन्दी साहित्य कबीर के पद सप्रसंग व्याख्या प्रश्न उत्तर । NCERT नोट्स
कक्षा 11 हिन्दी - कबीर के पदों की सप्रसंग व्याख्या -
पहला पद
अरे इन दोहुन राह न पाई।
हिंदू अपनी करै बड़ाई गागर छुअन न देई।
वेश्या के पायन तर सोवै यह देखो हिंदुआई।
मुसलमान के पीर औलिया मुरगा मुरगी खाई।
खाला केरी बेटी ब्याहैं घरही में करै सगाई।
बाहर से एक मुर्दा ल्याए धोइ धाइ चढ़वाई।
सब सखियाँ मिलि जेवन बैठीं घर भर करै बड़ाई।
हिंदुन की हिंदुआई देखी तुरकन की तुरकाई।
कहै कबीर सुनो भाई साधो कौन राह ह्वै जाई।
प्रसंग -
प्रस्तुत पद हमारी पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग 1 में संकलित निर्गुण काव्यधारा के कवि कबीरदास जी द्वारा रचित है। इसमें कवि ने हिंदू और मुसलमान दोनों धर्मों के बाह्य दिखावे, छुआछूत और पाखंड पर कड़वा प्रहार करते हुए उन्हें सच्चे मार्ग पर चलने की सीख दी है।
व्याख्या -
कबीरदास जी कहते हैं कि मुझे तो ऐसा लगता है कि इन दोनों धर्मों के लोगों को भगवान को पाने का सही रास्ता नहीं मिला। वे दोनों ही दिखावे में फंसे हैं। पहले हिंदुओं की बात करते हुए कबीर कहते हैं कि हिंदू लोग अपनी बहुत तारीफ करते हैं।
वे खुद को बहुत ऊंचा मानते हैं और छुआछूत पर यकीन रखते हैं। वे किसी दूसरे को अपना पानी का घड़ा तक छूने नहीं देते। लेकिन दूसरी तरफ कबीर उनकी सच्चाई बताते हुए कहते हैं कि यही लोग वेश्याओं के पैरों के पास जाकर सोते हैं। यह कैसी अच्छाई और कैसा धर्म है ?
इसके बाद कबीर मुसलमानों पर बात करते हैं। वे कहते हैं कि मुसलमानों के बड़े-बड़े गुरु और संत भी मांस खाते हैं और मुर्गा-मुर्गी मारकर पेट भरते हैं। वे अपने ही घर में मौसी की बेटी से शादी कर लेते हैं। अपनों के बीच ही रिश्ते तय कर लेते हैं।
वे बाहर से किसी मरे हुए जानवर का मांस लाते हैं, उसे धोकर अच्छे से पकाते हैं। फिर घर की सभी औरतें मिलकर उसे बड़े चाव से खाती हैं और पूरे घर में अपनी तारीफ करती हैं।
कबीर कहते हैं कि मैंने हिंदुओं का हिंदू धर्म भी देख लिया और मुसलमानों का मुसलमान धर्म भी देख लिया। दोनों में ही केवल दिखावा है। कबीरदास जी कहते हैं कि हे संतों, अब तुम ही बताओ कि इंसान को किस रास्ते पर चलना चाहिए, क्योंकि ये दोनों रास्ते तो बिल्कुल गलत हैं।
विशेष -
1. कबीरदास ने समाज के पाखंड और दिखावे को सबके सामने रखा है।
3. कवि ने बिना डरे दोनों धर्मों की कमियों को उजागर किया है।
दूसरा पद
बालम, आवो हमारे गेह रे।
तुम बिन दुखिया देह रे।
सब कोई कहै तुम्हारी नारी, मोकों लगत लाज रे।
दिल से नहीं लगाया, तब लग कैसा सनेह रे॥
अन्न न भावै नींद न आवै, गृह-बन धरै न धीर रे।
कामिन को है बालम प्यारा, ज्यों प्यासे को नीर रे॥
है कोई ऐसा पर-उपकारी, पिवसों कहै सुनाय रे।
अब तो बेहाल कबीर भयो है, बिन देखे जिव जाय रे॥
प्रसंग -
प्रस्तुत पद हमारी पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग 1 में संकलित संत कबीरदास जी के पदों से लिया गया है। इस पद में कबीर दस जी ने स्वयं को एक विरहिणी स्त्री (आत्मा) के रूप में और ईश्वर को अपना पति (परमात्मा ) मानकर अपनी व्याकुलता को व्यक्त किया गया है।
व्याख्या -
कबीरदास जी कहते हैं कि हे मेरे प्रियतम, आप मेरे घर वापस आ जाओ। आपके बिना मेरा यह शरीर बहुत दुखी है। दुनिया के सब लोग मुझे आपकी पत्नी कहते हैं, लेकिन मुझे इस बात पर तब तक यकीन नहीं होता जब तक आप मुझसे मिलने नहीं आते।
जब तक प्रेमी और प्रेमिका एक साथ एक बिस्तर पर नहीं सोते, तब तक सच्चा प्यार कैसे माना जा सकता है? भगवान के दूर रहने के कारण कबीर को न तो खाना अच्छा लगता है और न ही रात को नींद आती है। उन्हें न तो घर में अच्छा लगता है और न ही वन में चैन मिलता है।
कबीर कहते हैं कि जैसे किसी प्यासे इंसान के लिए पानी बहुत जरूरी होता है, वैसे ही एक पत्नी के लिए उसका पति बहुत प्यारा होता है। कबीरदास जी दुनिया के लोगों से पूछते हैं कि क्या कोई ऐसा भलाई करने वाला इंसान है जो मेरी इस हालत के बारे में मेरे भगवान को जाकर बताए ?
कबीर कहते हैं कि अब भगवान के बिना मेरी हालत बहुत खराब हो गई है। अगर अब भगवान के दर्शन नहीं हुए तो मेरे प्राण निकल जाएंगे।
विशेष -
1. कवि कबीर ने जीवात्मा को 'पत्नी' और परमात्मा को 'पति' मानकर अपने अनन्य प्रेम व दांपत्य भाव को अभिव्यक्त किया है।2. इस पद में परमात्मा से दूर रहने की व्याकुलता दिखाई गई है, जिससे यहाँ वियोग शृंगार रस और करुण भाव की प्रधानता है।
3.आम बोलचाल के शब्दों का इस्तेमाल होने से बात सीधे दिल को छूती है।
कबीर कक्षा 11 हिन्दी बहुविकल्पीय प्रश्न -
प्रश्न 1: कबीरदास जी भक्ति काल की किस काव्यधारा के कवि हैं ?
(क) सगुण काव्यधारा
(ख) निर्गुण ज्ञानाश्रयी काव्यधारा
(ग) सूफी काव्यधारा
(घ) कृष्ण भक्ति काव्यधारा
उत्तर: (ख) निर्गुण ज्ञानाश्रयी काव्यधारा
प्रश्न 2: कबीर की वाणियों का संग्रह किस रचना में मिलता है ?
(क) सुरसागर
(ख) रामायण
(ग) बीजक
(घ) कवितावली
उत्तर: (ग) बीजक
प्रश्न 3: पहले पद में कबीर ने किन दो धर्मों के बाह्य आडंबरों पर चोट की है ?
(क) हिंदू और ईसाई
(ख) हिंदू और मुसलमान
(ग) सिख और ईसाई
(घ) बौद्ध और जैन
उत्तर: (ख) हिंदू और मुसलमान
प्रश्न 4: दूसरे पद में कबीर ने स्वयं को किस रूप में प्रस्तुत किया है ?
(क) एक सन्यासी के रूप में
(ख) एक राजा के रूप में
(ग) एक विरहिणी पत्नी के रूप में
(घ) एक शिष्य के रूप में
उत्तर: (ग) एक विरहिणी पत्नी के रूप में
प्रश्न 5: कबीर के अनुसार प्यासे व्यक्ति को किसकी आवश्यकता होती है ?
(क) धन की
(ख) भोजन की
(ग) नीर की
(घ) वस्त्र की
उत्तर: (ग) नीर की
प्रश्न 6: कबीरदास जी के गुरु का क्या नाम था ?
(क) स्वामी रामानंद
(ख) गुरु नानक देव
(ग) तुलसीदास
(घ) रैदास
उत्तर: (क) स्वामी रामानंद
प्रश्न 7: कबीरदास जी का देहावसान किस स्थान पर हुआ था ?
(क) काशी
(ख) मगहर
(ग) मथुरा
(घ) अयोध्या
उत्तर: (ख) मगहर
प्रश्न 8: कबीर के अनुसार किसे रात-दिन नींद और भूख नहीं लग रही है ?
(क) समाज के राजा को
(ख) समाज के पाखंडी लोगों को
(ग) भगवान के वियोग में तड़पती जीवात्मा को
(घ) वन में रहने वाले पशुओं को
उत्तर: (ग) भगवान के वियोग में तड़पती जीवात्मा को
कबीर दास कक्षा 11 हिन्दी पाठ्यपुस्तक के प्रश्न और उत्तर -
प्रश्न 9 कबीर ने हिंदुओं के किस दिखावे पर चोट की है ?
उत्तर कबीर ने कहा है कि हिंदू लोग छुआछूत को बहुत मानते हैं। वे किसी दूसरे को अपनी पानी की मटकी भी नहीं छूने देते। लेकिन दूसरी तरफ वे वेश्याओं के पास जाते हैं। कबीर कहते हैं कि यह उनका कैसा धर्म है जहां एक तरफ इतनी छुआछूत है और दूसरी तरफ ऐसा खराब व्यवहार है।
प्रश्न 10 मुसलमानों के बारे में कबीर क्या कमियां बताते हैं ?
उत्तर कबीर कहते हैं कि मुसलमानों के गुरु और संत भी जीव हत्या करते हैं और मांस खाते हैं। वे अपने ही परिवार में मौसी की बेटी से शादी कर लेते हैं। वे मरे हुए जानवर का मांस लाकर घर में पकाते हैं और सब मिलकर खुश होते हैं। कबीर इसे सच्चा धर्म नहीं मानते।
प्रश्न 11 दूसरे पद में कबीर ने खुद को किस रूप में दिखाया है और क्यों ?
उत्तर दूसरे पद में कबीर ने खुद को एक विरहिणी स्त्री यानी पति से दूर रहने वाली पत्नी के रूप में दिखाया है। उन्होंने भगवान को अपना पति माना है। ऐसा उन्होंने इसलिए किया है क्योंकि एक पत्नी अपने पति से सबसे ज्यादा प्यार करती है और उसके दूर होने पर सबसे ज्यादा तड़पती है। कबीर भी भगवान के लिए वैसी ही तड़प महसूस कर रहे हैं।
प्रश्न 12 कबीर को नींद और भूख क्यों नहीं लग रही है ?
उत्तर कबीर को अपने प्रियतम यानी भगवान से दूर होने का बहुत गहरा दुख है। उनके मन में भगवान से मिलने की तीव्र बेचैनी है। इसी तड़प के कारण उन्हें न तो खाना अच्छा लग रहा है और न ही रात को नींद आ रही है।
कक्षा 11 हिन्दी साहित्य 'कबीर' भाव सौंदर्य से जुड़े प्रश्न उत्तर -
प्रश्न 13 अरे इन दोहुन राह न पाई। इस पंक्ति का भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर इस पंक्ति का भाव यह है कि कबीरदास जी समाज में फैले अंधविश्वास और दिखावे से बहुत दुखी हैं। वे देखते हैं कि हिंदू और मुसलमान दोनों ही धर्मों के लोग अपनी-अपनी परंपराओं को श्रेष्ठ बताते हैं।
वास्तविक जीवन में वे नैतिक मूल्यों और मानवता के रास्ते से भटक चुके हैं। कवि ने इस पंक्ति के माध्यम से दोनों संप्रदायों की अज्ञानता पर गहरा कटाक्ष किया है।
प्रश्न 14 कामिनि को है बालम प्यारा ज्यों प्यासे को नीर रे। पंक्ति में निहित भाव सौंदर्य को बताइए।
उत्तर इस पंक्ति में कबीर ने एक विरहिणी स्त्री के माध्यम से भक्त और भगवान के गहरे संबंध को दर्शाया है। जिस तरह चिलचिलाती धूप में तड़पते हुए प्यासे व्यक्ति के लिए पानी जीवन रक्षक होता है, ठीक उसी तरह एक सच्ची पत्नी के लिए उसका पति ही उसका सर्वस्व होता है।
यहाँ कबीर का भाव यह है कि ईश्वर से मिलन भक्त की कोई साधारण इच्छा नहीं है, बल्कि यह उसके जीवित रहने के लिए पानी की तरह अनिवार्य आवश्यकता है।
प्रश्न 15 हिंदू अपनी करै बड़ाई गागर छुअन न देई। वेश्या के पायन तर सोवै यह देखो हिंदुआई। इन पंक्तियों का भाव सौंदर्य क्या है ?
उत्तर इन पंक्तियों में कबीरदास जी ने समाज के दोहरे चरित्र और पाखंड को बेनकाब किया है। हिंदू समाज एक तरफ छुआछूत की भावना रखता है और किसी को अपना घड़ा तक छूने नहीं देता, जो उनकी झूठी श्रेष्ठता को दिखाता है।
वहीं दूसरी तरफ, वे नैतिक रूप से गिरकर वेश्याओं के चरणों में बैठते हैं। कवि का भाव यह है कि समाज बाहर से खुद को पवित्र दिखाता है लेकिन भीतर से अपवित्रता से भरा हुआ है ।
प्रश्न 16 अब तो बेहाल कबीर भयो है बिन देखे जिय जाइ रे। इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर इस पंक्ति में विरह भावना अपनी चरम सीमा पर है। कबीरदास जी कहते हैं कि ईश्वर के वियोग में आत्मा की दशा बहुत दयनीय हो गई है।
यहाँ भाव यह है कि जब भक्त सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर पूरी तरह भगवान में लीन हो जाता है, तो उसे एक-एक पल का वियोग मृत्यु के समान लगता है। दर्शन न मिलने पर प्राण निकल जाने की बात आत्मा की चरम व्याकुलता को प्रकट करती है।
प्रश्न 17: खाला केरी बेटी ब्याहैं घरही में करै सगाई। इस पंक्ति के माध्यम से कबीर क्या भाव व्यक्त करना चाहते हैं?
उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कबीरदास जी ने मुसलमान समाज की एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था पर सवाल उठाया है जो उनके अनुसार सही नहीं है। वे कहते हैं कि जो लोग बाहर से बहुत पवित्र होने का दावा करते हैं, वे अपने ही परिवार में मौसी की बेटी से विवाह कर लेते हैं। कबीर का भाव यह है कि धर्म के ठेकेदार समाज को सही दिशा देने की बजाय खुद ही मर्यादाओं को भूल चुके हैं।
कक्षा 11 कबीर पाठ के परीक्षा उपयोगी अन्य प्रश्न उत्तर -
प्रश्न 18 - कबीरदास को समाज सुधारक क्यों कहा जाता है ?
उत्तर कबीरदास ने अपने समय में समाज में फैली हर गलत बात का खुलकर विरोध किया। उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों दोनों की कमियों को बिना किसी डर के सबके सामने रखा। उन्होंने जाति-पाति, छुआछूत और झूठे दिखावे को मिटाने की कोशिश की। इसलिए उन्हें एक महान समाज सुधारक माना जाता है।
प्रश्न 19 कबीर की भक्ति किस प्रकार की है ?
उत्तर कबीर की भक्ति भावना का मुख्य रूप निर्गुण के साथ अनन्य प्रेम से संबंधित है। वे ईश्वर के निराकार स्वरूप की आराधना करते हैं । इसका मतलब है कि वे किसी मूर्ति की पूजा नहीं करते थे। वे मानते थे कि भगवान का कोई रंग, रूप या आकार नहीं होता। भगवान किसी मंदिर या मस्जिद में नहीं रहते, बल्कि वे हर मनुष्य के अंदर निवास करते हैं।
आशा है आज की इस पोस्ट में कक्षा 11 हिन्दी साहित्य कबीर के पद सप्रसंग व्याख्या प्रश्न उत्तर के बारे में दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी है । अपने साथियों के साथ अवश्य शेयर करें ।