कक्षा 12 हिन्दी साहित्य : अंतरा भाग 2 यह दीप अकेला और मैंने देखा एक बूंद नोट्स

इस पोस्ट में कक्षा 12 हिंदी साहित्य के अंतरा भाग 2 में अज्ञेय द्वारा रचित पाठ 'यह दीप अकेला' और 'मैंने देखा एक बूंद' की सप्रसंग व्याख्या, अज्ञेय का जीवन और कवि परिचय और प्रश्न-उत्तर बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे।
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कक्षा 12 हिन्दी साहित्य  अंतरा भाग 2 पाठ अज्ञेय सप्रसंग व्याख्या प्रश्न उत्तर । NCERT Notes


अज्ञेय का जीवन और कवि परिचय -

  • अज्ञेय जी का जन्म सन 1911 में कसया, कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
  • वे हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद और नई कविता के जनक माने जाते हैं।
  • उन्होंने प्रसिद्ध 'तार सप्तक' का संपादन भी किया था।
  • उनकी कविताओं में व्यक्ति के आत्मसम्मान और समाज के साथ उसके जुड़ाव का सुंदर चित्रण मिलता है।
  • उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्दों से युक्त खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें नए-नए उपमानों का प्रयोग देखने को मिलता है।
  • आँगन के पार द्वार, हरी घास पर क्षण भर और इत्यलम उनके प्रसिद्ध काव्य संग्रह हैं।
  • इस महान बुद्धिजीवी कवि का निधन सन 1987 में हुआ था।

'यह दीप अकेला' कविता के कठिन शब्दार्थ

कठिन शब्द

अर्थ

स्नेह

तेल (कविता के संदर्भ में: प्रेम/करुणा)

मदमाता

अपनी ही मस्ती में मतवाला / गर्व से भरा हुआ

समष्टि

समाज / सामूहिक सत्ता

व्यष्टि

व्यक्ति / व्यक्तिगत सत्ता

कृती

भाग्यशाली / कुशल कलाकार / निपुण

पनडुब्बा

गोताखोर (पानी में डूबकर मोती लाने वाला)

समिधा

यज्ञ या हवन में जलने वाली पवित्र लकड़ी

विसर्जित

त्याग करना / समाज को समर्पित करना

गोरस

गाय का दूध या दही

पय

दूध / अमृत के समान पवित्र जल

स्वयंभू

स्वयं उत्पन्न होने वाला (अपनी मेहनत से बना हुआ)

अयुत

दस हजार / अनगिनत / असीम

अज्ञेय 'यह दीप अकेला' सप्रसंग व्याख्या -

अज्ञेय जी की यह कविता व्यक्ति (दीपक) और समाज (पंक्ति) के संबंध को दर्शाती है।

छंद 1

यह दीप अकेला स्नेह भरा

है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।

यह जन है गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा ?

पनडुब्बा यह मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा ?

यह समिधा ऐसी आग हठीली सुलगाएगा ?

यह अद्वितीय यह मेरा यह मैं स्वयं विसर्जित।

यह दीप अकेला स्नेह भरा

है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।

प्रसंग - प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग-2 के काव्य खंड के तीसरे पाठ यह दीप अकेला से लिया गया है। इसके रचयिता अज्ञेय हैं।

प्रसंग - प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने 'दीपक' को व्यक्ति (व्यष्टि) का और 'पंक्ति' को समाज (समष्टि) का प्रतीक माना है। 
कवि का मानना है कि व्यक्ति कितना भी गुणवान, प्रतिभावान और रचनात्मक क्यों न हो, जब तक वह समाज के साथ नहीं जुड़ता, तब तक उसका महत्व अधूरा रहता है। इसलिए कवि अकेले दीपक को पंक्ति में शामिल करने पर बल देते हैं।

व्याख्या - कवि कहते हैं कि यह दीपक तेल (स्नेह और प्रेम) से पूरी तरह भरा हुआ है। इसे अपनी रोशनी पर गर्व भी है और यह अपनी ही मस्ती में मतवाला हो रहा है, लेकिन यदि यह अकेला ही जलता रहेगा तो इसका कोई बड़ा लाभ नहीं होगा। इसलिए इस अकेले दीपक को भी दीपकों की कतार (पंक्ति) में शामिल कर दो, ताकि इसकी शक्ति और बढ़ जाए।

ठीक इसी तरह समाज में गुणवान व्यक्ति भी अपनी कला में निपुण होता है, पर जब तक वह समाज से नहीं जुड़ता, उसका महत्व अधूरा रहता है। यह व्यक्ति ऐसा गायक है जो सुंदर गीत गाता है, यदि इसे समाज में स्थान नहीं मिला तो ऐसे गहरे गीत और कौन गाएगा ?

यह ऐसा गोताखोर (पनडुब्बा) है जो विचारों के गहरे सागर से सच्चे मोती निकाल कर लाता है, यदि इसका सम्मान नहीं हुआ तो ऐसा भाग्यशाली कलाकार और कहाँ मिलेगा ? यह व्यक्ति यज्ञ की उस लकड़ी (समिधा) की तरह है जो अपने भीतर त्याग की एक अनोखी आग छिपाए रखता है।

यह व्यक्ति बिल्कुल अनोखा (अद्वितीय) है, इसमें अपनी एक पहचान है, लेकिन यदि समाज कल्याण के लिए इसे खुद को समर्पित करना पड़े, तो इसे भी समाज की मुख्यधारा से जोड़ देना चाहिए।

विशेष (काव्य सौंदर्य) -

1. दीपक को व्यक्ति का और पंक्ति को समाज का प्रतीक मानकर सुंदर प्रतीकात्मक शैली का प्रयोग हुआ है।

2.'गर्व भरा मदमाता' और 'आग हठीली' में बहुत सुंदर लाक्षणिकता दिखाई देती है।

3. भाषा संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्दों से सजी हुई खड़ी बोली हिंदी है।



छंद 2

यह मधु है स्वयं काल की मौना का युग-संचय,

यह गोरस जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत पय,

यह अंकुर फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय,

यह प्रकृत स्वयंभू ब्रह्म अयुत इसको भी शक्ति को दे दो।

यह दीप अकेला स्नेह भरा

है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।

प्रसंग - प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग-2 के काव्य खंड के तीसरे पाठ यह दीप अकेला से लिया गया है। इसके रचयिता अज्ञेय हैं।

प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने मानव की आंतरिक क्षमताओं, उसके संघर्ष और निडर स्वभाव की तुलना प्रकृति के अनमोल तत्वों (मधु, गोरस और अंकुर) से की है।

कवि संदेश देते हैं कि इस असीम शक्ति और प्रतिभा से संपन्न व्यक्ति को समाज की सामूहिक शक्ति को सौंप देना चाहिए, ताकि राष्ट्र का कल्याण हो सके।

व्याख्या - कवि कहते हैं कि समाज का यह विशिष्ट व्यक्ति समय रूपी मधुमक्खी के छत्ते से टपका हुआ वह शुद्ध शहद (मधु) है, जिसे बनने में युगों का समय लगा है। यह व्यक्ति जीवन रूपी कामधेनु गाय का वह पवित्र दूध (गोरस) है जो अमृत के समान शुद्ध है।

यह व्यक्ति उस छोटे से अंकुर की तरह है जो धरती की कठोर छाती को चीर कर बाहर निकलता है और बिना किसी डर के सीधे सूर्य की तरफ देखता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक है, अपनी मेहनत से पैदा हुआ (स्वयंभू) है और ईश्वर के समान अनंत शक्तियों से भरा हुआ है।

इसलिए इस प्रतिभाशाली व्यक्ति को समाज की सामूहिक शक्ति (पंक्ति) को सौंप दो, ताकि इसकी शक्तियों का लाभ पूरे देश को मिल सके।

विशेष (काव्य सौंदर्य) -

1.जीवन-कामधेनु में जीवन को कामधेनु गाय मान लेने के कारण रूपक अलंकार है।


2. 'अंकुर फोड़ धरा को' पंक्ति में व्यक्ति के संघर्ष और निडर स्वभाव का सुंदर बिंब उकेरा गया है।


3. भाषा सरल, गंभीर और विचारों से ओत-प्रोत खड़ी बोली हिंदी है।



'मैंने देखा एक बूंद' कविता के कठिन शब्दार्थ

कठिन शब्द

अर्थ

सहसा

अचानक / एकाएक

क्षण भर

एक पल के लिए (बहुत कम समय)

क्षणभंगुर

पल भर में नष्ट हो जाने वाला

विराट

विशाल / असीम ब्रह्मांड या ईश्वर

सून (सूने)

खालीपन / एकांत

सम्मुख

सामने

आलोक

प्रकाश / ज्ञान का दिव्य उजाला

उन्मोचन

बंधन से मुक्त होना / छुटकारा

नश्वरता

नष्ट होने वाला स्वभाव (मरणशीलता)


 अज्ञेय 'मैंने देखा एक बूंद' सप्रसंग व्याख्या -


अज्ञेय जी की यह एक छोटी सी दार्शनिक कविता है जो जीवन के क्षणभंगुर होने (नष्ट होने वाले स्वभाव) को बताती है।

मैंने देखा एक बूँद

सहसा उछली सागर से,

रंग गयी क्षण भर ढलते सूरज की आग से।

मुझको दीख गया :

सून विराट के सम्मुख

हर आलोक-छुआ अपनापन

है उन्मोचन नश्वरता के दाग से !

प्रसंग - प्रस्तुत कविता हमारी पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग-2 के काव्य खंड के तीसरे पाठ मैंने देखा एक बूँद से ली गई है। इसके रचयिता अज्ञेय हैं। इस कविता में कवि ने समुद्र की एक बूँद के माध्यम से मनुष्य के छोटे से जीवन की सार्थकता को समझाया है।

व्याख्या - कवि कहते हैं कि मैंने एक बार समुद्र के किनारे खड़े होकर देखा कि पानी की एक छोटी सी बूँद अचानक समुद्र की विशाल लहरों से ऊपर उछली। वह बूँद केवल एक पल (क्षण भर) के लिए हवा में रही, लेकिन ठीक उसी समय ढलते हुए सूरज की लाल किरणें उस पर पड़ीं, जिससे वह बूँद सोने की तरह चमक उठी।

उस दृश्य को देखकर कवि को जीवन का एक बहुत बड़ा सच समझ में आ गया। कवि कहते हैं कि इस संसार के सूने और विशाल (विराट) रूप के सामने हमारा जीवन बहुत छोटा है, लेकिन यदि हम उस छोटे से जीवन में भी परमात्मा के ज्ञान रूपी प्रकाश (आलोक) को छू लेते हैं, तो हमारा वह एक पल का जीवन भी सार्थक हो जाता है।

वह चमक हमें इस बात का अहसास कराती है कि भले ही हमारा शरीर नश्वर (नष्ट होने वाला) है, लेकिन उस एक पल की दिव्यता हमें हमेशा के लिए अमर बना देती है और मरने के डर (नश्वरता के दाग) से पूरी तरह मुक्त (उन्मोचन) कर देती है।

विशेष (काव्य सौंदर्य) -


1. बूँद को मनुष्य का और सागर को ईश्वर या संसार का प्रतीक माना गया है।


2. 'क्षण भर' की चमक के माध्यम से जीवन के हर एक पल को खुशी से जीने का संदेश दिया गया है।


3. कविता बहुत छोटी, अर्थपूर्ण और शांत रस से परिपूर्ण है।


 अज्ञेय यह दीप अकेला और मैंने देखा एक बूंद प्रश्न उत्तर -

बहुविकल्पीय प्रश्न 

प्रश्न 1 'यह दीप अकेला' कविता के रचयिता कौन हैं ?

(क) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

(ख) सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'

(ग) जयशंकर प्रसाद

(घ) केदारनाथ सिंह

उत्तर (ख)

प्रश्न 2 'यह दीप अकेला' कविता में 'दीप' किसका प्रतीक है ?

(क) देश का

(ख) अंधकार का

(ग) व्यष्टि (व्यक्ति) का

(घ) शोषित वर्ग का

उत्तर (ग)

प्रश्न 3 'यह दीप अकेला' कविता में 'पंक्ति' किसका प्रतीक है ?

(क) कतार का

(ख) विद्यालय का

(ग) समष्टि (समाज) का

(घ) देश की सीमा का

उत्तर (ग)

प्रश्न 4 'मैंने देखा एक बूंद' कविता में 'बूंद' किससे अलग होती है ?

(क) बादलों से

(ख) घड़े से

(ग) सागर से

(घ) नदी से

उत्तर (ग)

प्रश्न 5 'मैंने देखा एक बूंद' कविता में बूंद किस प्रकाश से रंग जाती है ?

(क) बिजली के प्रकाश से

(ख) ढलते सूरज की आग (धूप) से

(ग) चंद्रमा की चांदनी से

(घ) दीपक की लौ से

उत्तर ( ख )

प्रश्न 6 अज्ञेय जी किस काव्यधारा के प्रवर्तक कवि माने जाते हैं ?

(क) प्रयोगवाद

(ख) प्रगतिवाद

(ग) छायावाद

(घ) नई कविता

उत्तर ( क )


प्रश्न 7 'यह दीप अकेला' में दीप को कैसा बताया गया है ?

(क) बुझा हुआ

(ख) गर्व भरा मदमाता

(ग) डर से कांपता हुआ

(घ) कमजोर और पीला

उत्तर (ख)

प्रश्न 8 'सूने विराट' का अर्थ कविता के संदर्भ में क्या है ?

(क) खाली कमरा

(ख) असीम और विशाल संसार

(ग) गहरा कुआँ

(घ) निर्जन रेगिस्तान

उत्तर (ख)


कक्षा 12 हिन्दी साहित्य अंतरा भाग 2 पाठ अज्ञेय अति लघूत्तरात्मक प्रश्न 

प्रश्न 9 'यह दीप अकेला' में 'नेह' (स्नेह) का क्या अर्थ है ?

उत्तर कविता के संदर्भ में 'नेह' का अर्थ तेल के साथ-साथ मनुष्य के भीतर का प्रेम, करुणा और मानवीय भावनाएं हैं।

प्रश्न 10 कवि दीप को पंक्ति में शामिल क्यों करना चाहता है ?

उत्तर कवि दीप को पंक्ति में इसलिए शामिल करना चाहता है ताकि व्यक्ति के गुणों का लाभ समाज को मिल सके और समाज का कल्याण हो।

प्रश्न 11 अज्ञेय जी ने मनुष्य को 'पनडुब्बा' क्यों कहा है ?

उत्तर जैसे पनडुब्बा गहरे पानी से मोती लाता है, वैसे ही मनुष्य अपने अंतर्मन की गहराई में डूबकर सत्य और नए विचारों की खोज करता है।

प्रश्न 12 'मैंने देखा एक बूंद' कविता में 'क्षण' का क्या महत्व है ?

उत्तर जीवन का एक छोटा सा कीमती पल भी यदि सार्थकता और दिव्य प्रकाश से भर जाए, तो वह मनुष्य को अमरता का अहसास करा देता है।

प्रश्न 13 'नश्वरता के दाग' का क्या अर्थ है ?

उत्तर इसका अर्थ मनुष्य के जीवन की क्षणभंगुरता, अंत में मिट जाने का दुःख और मृत्यु का भय है।

प्रश्न 14 कविता में 'समिधा' किसका प्रतीक है ?

उत्तर 'समिधा' (हवन की लकड़ी) समाज के कल्याण के लिए व्यक्ति द्वारा खुद को खपाने और त्याग करने का प्रतीक है।

प्रश्न 15 'सदा-जिज्ञासु' और 'सदा-प्रबुद्ध' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ?

उत्तर यह हर समय नया सीखने के लिए उत्सुक और हमेशा विवेकवान व जागरूक रहने वाले श्रेष्ठ व्यक्ति के लिए प्रयुक्त हुआ है।

प्रश्न 16 बूंद का सागर से अलग होना क्या दर्शाता है ?

उत्तर बूंद का सागर से अलग होना विशाल समष्टि (संसार) के बीच व्यक्ति के अपने स्वतंत्र अस्तित्व को दर्शाता है।


कक्षा 12 हिन्दी साहित्य अंतरा भाग 2 पाठ अज्ञेय लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 17 'यह दीप अकेला' कविता में दीपक का पंक्ति में विलय क्यों आवश्यक माना गया है ?

उत्तर दीपक व्यक्ति (व्यष्टि) का प्रतीक है और पंक्ति समाज (समष्टि) की प्रतीक है। दीपक अकेले जलकर केवल सीमित प्रकाश दे सकता है । 

 वह पंक्ति में शामिल होता है तो उसकी शक्ति और प्रकाश दोनों बढ़ जाते हैं। समाज में विलीन होकर ही व्यक्ति का अस्तित्व सार्थक और लोक-कल्याणकारी बनता है।

प्रश्न 18 "यह सदा-जिज्ञासु, सदा-प्रबुद्ध, सदा-श्रद्धालु" पंक्तियों के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है ?

उत्तर इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने जागरूक और गुणी मनुष्य की विशेषताएं बताई हैं। सच्चा मनुष्य हमेशा नया ज्ञान सीखने के लिए जिज्ञासु रहता है, उसका विवेक हमेशा जाग्रत रहता है और वह मानवता के प्रति गहरी श्रद्धा रखता है। समाज को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे ही श्रेष्ठ व्यक्तियों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 19 'मैंने देखा एक बूंद' कविता में सागर और बूंद के माध्यम से कवि ने क्या दार्शनिक संदेश दिया है ?

उत्तर कवि ने सागर को विराट संसार (समष्टि) और बूंद को मनुष्य के छोटे से जीवन (व्यष्टि) का प्रतीक माना है। बूंद सागर से अलग होकर थोड़ी देर के लिए अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाती है।

इसके माध्यम से कवि संदेश देता है कि मनुष्य का जीवन भले ही छोटा हो, लेकिन वह समाज से अलग होकर भी अपने जीवन को चमका सकता है।

प्रश्न 20 ढलते हुए सूरज की लाल किरणों का बूंद पर क्या प्रभाव पड़ा और उसका क्या महत्व है ?

उत्तर जब ढलते हुए सूरज की लाल किरणें सागर से उछली बूंद पर पड़ीं, तो वह क्षण भर के लिए सोने की तरह चमक उठी। इसका महत्व यह है कि वह बूंद भले ही नष्ट होने वाली थी, लेकिन उस एक छोटे से पल में उसने सूर्य के दिव्य प्रकाश को छूकर अपने अस्तित्व को सार्थक और सुंदर बना लिया ।


प्रश्न 21 कवि अज्ञेय ने व्यक्ति को 'मधु', 'गोरस' और 'समिधा' क्यों कहा है ?

उत्तर कवि के अनुसार जैसे मधु (शहद) समय के साथ मीठा होता है, गोरस (दूध-दही) पोषण देता है और समिधा (हवन की लकड़ी) पवित्र आग जलाती है; वैसे ही गुणी व्यक्ति समाज को अपने अच्छे विचारों का रस देता है ।

अपने ज्ञान से समाज का पोषण करता है और समाज की भलाई के लिए खुद का बलिदान देने को तैयार रहता है।

प्रश्न 22 "जिन्हें फिर और कौन गाएगा ?" पंक्ति के द्वारा कवि व्यक्ति की किस विशेषता को रेखांकित करता है ?

उत्तर इस पंक्ति के द्वारा कवि व्यक्ति की मौलिकता और अनूठी रचनात्मक प्रतिभा को दर्शाता है। हर मनुष्य के भीतर कुछ विशेष गुण और नए विचार होते हैं जो केवल उसी के पास होते हैं।

अगर समाज उस व्यक्ति को सम्मान देकर अपने साथ नहीं जोड़ेगा, तो उसके वे अनोखे विचार और गीत हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे।

प्रश्न 23 'मैंने देखा एक बूंद' कविता के अनुसार 'सूने विराट के सम्मुख' मनुष्य की क्या स्थिति है ?

उत्तर इस विशाल और असीम संसार के सामने मनुष्य का जीवन बहुत छोटा और क्षणभंगुर है। मनुष्य को हमेशा इस बात का डर रहता है कि एक न एक दिन उसे नष्ट हो जाना है।

लेकिन कवि कहता है कि इस सूने विराट के सामने भी मनुष्य अपने सत्कर्मों और ज्ञान के प्रकाश से उस छोटे से जीवन को भी अमर बना सकता है।

प्रश्न 24 'नश्वरता के दाग से मुक्ति' का क्या आशय है और यह कैसे प्राप्त होती है ?

उत्तर इसका आशय मृत्यु के भय और जीवन के मिट जाने के दुःख से पूरी तरह मुक्त होना है। जब मनुष्य अपने स्वार्थ को छोड़कर सत्य और ईश्वर के प्रकाश को पहचान लेता है, तो उसे समझ आ जाता है कि शरीर भले ही नश्वर हो, लेकिन आत्मा अमर है। परमात्मा के इस अनूठे अहसास को छूते ही मनुष्य मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है।


अंतरा भाग 2 पाठ अज्ञेय दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 25 'यह दीप अकेला' कविता का मूल भाव या प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर 'यह दीप अकेला' कविता का मुख्य संदेश व्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए उसे समाज के साथ जोड़ना है।

कवि का मानना है कि मनुष्य अद्वितीय गुणों, शक्तियों और मौलिक विचारों का केंद्र है। वह अपने आप में पूर्ण और आत्मनिर्भर है, लेकिन अकेले रहने से उसकी शक्तियों का लाभ संसार को नहीं मिल पाता।

जब व्यक्ति का विलय समाज में होता है, तो समाज को एक योग्य मार्गदर्शक मिलता है और व्यक्ति के जीवन को वास्तविक सार्थकता प्राप्त होती है। यह कविता व्यक्ति और समाज के आपसी गहरे संबंध को बहुत सुंदर ढंग से दर्शाती है।

प्रश्न 26 'मैंने देखा एक बूंद' कविता के आधार पर क्षण के महत्व (क्षणभंगुरता) पर प्रकाश डालिए।

उत्तर इस कविता में कवि अज्ञेय ने जीवन के एक बहुत बड़े दार्शनिक सत्य को उजागर किया है। संसार में सब कुछ परिवर्तनशील और नश्वर है। मनुष्य का जीवन भी सागर की एक बूंद की तरह पल भर का है।

परंतु कवि संदेश देता है कि जीवन का छोटा होना दुखद नहीं है, बल्कि उस छोटे से जीवन को हम कैसे जीते हैं, यह महत्वपूर्ण है। यदि हम जीवन के एक भी क्षण को पूरी सार्थकता, सच्चाई और परोपकार के साथ जी लेते हैं, तो वह क्षण हमें अमरता का अहसास करा देता है। क्षण का यही सदुपयोग हमें मृत्यु के डर से मुक्त करता है।

प्रश्न 27 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' की काव्य-शैली और भाषागत विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर अज्ञेय जी हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद के जनक माने जाते हैं, इसलिए उनकी कविताओं में नए प्रयोग साफ दिखाई देते हैं। उनकी भाषा शुद्ध, साहित्यिक और तत्सम शब्दों से युक्त खड़ी बोली हिंदी है।

वे अपनी कविताओं में सीधे उपदेश देने के बजाय 'दीपक', 'पंक्ति', 'सागर' और 'बूंद' जैसे सटीक प्रतीकों और दृश्यों (बिंबों) का प्रयोग करते हैं। उनकी शैली दार्शनिक, गंभीर और विचारप्रधान है, जो पाठक को गहराई से सोचने पर मजबूर करती है। कम से कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह देना उनकी शैली की सबसे बड़ी खूबी है।

प्रश्न 28 "मुझको दीख गया सूने विराट के सम्मुख, हर आलोक-छुआ अपनापन है नश्वरता के दाग से ।" इन पंक्तियों का भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर इन पंक्तियों का भाव सौंदर्य यह है कि कवि जब सागर की बूंद को सूरज की किरणों से चमकते हुए देखता है, तो उसे एक दिव्य सत्य का साक्षात्कार होता है।

इस असीम और खाली संसार के सामने मनुष्य का जीवन बहुत छोटा है और अंत में नष्ट होना निश्चित है। लेकिन जब मनुष्य का अंतर्मन सत्य और ज्ञान के आलोक (प्रकाश) को छू लेता है, तो वह सांसारिक बंधनों और मृत्यु के डर से ऊपर उठ जाता है।

वह चमकता हुआ पल मनुष्य को यह अहसास करा देता है कि नष्ट होने के बाद भी उसका अस्तित्व उस विराट सत्ता का ही एक हिस्सा बना रहेगा।

आशा है कक्षा 12 हिन्दी साहित्य अंतरा भाग 2 पाठ अज्ञेय सप्रसंग व्याख्या , प्रश्न उत्तर जो NCERT नोट्स हैं की जानकारी आपको समझ आ गयी है । अपने साथियों के साथ भी अवश्य शेयर करें ।