शीर्षक का अर्थ व प्रासंगिकता - 'अतीत में दबे पाँव' का अर्थ है इतिहास के छिपे हुए साक्ष्यों को खोजना। यह शीर्षक 5000 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े शहर मोहनजोदड़ो के नगर नियोजन और उसकी उच्च संस्कृति को पूरी तरह प्रकट करता है।
सभ्यता का वातावरण - मोहनजोदड़ो एक बेहद अनुशासित, स्वच्छ और सुनियोजित नगर था। यहाँ के सीधे मार्ग, ढकी हुई नालियाँ, और व्यवस्थित मकान आज के आधुनिक वास्तुकला प्रेमियों को भी हैरान करते हैं।
निष्कर्ष - लेखक के अनुसार सिंधु सभ्यता एक 'लो-प्रोफाइल' समाज था, जहाँ 'भव्यता का आडंबर' (दिखावा या अहंकार) नहीं था। यह सभ्यता राजसत्ता या धर्मसत्ता के बल पर नहीं, बल्कि आम जनता के अनुशासन और आपसी सहयोग से पोषित थी।

ओम थानवी - अतीत में दबे पाँव कक्षा 12 हिन्दी प्रश्न उत्तर

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न - अतीत में दबे पाँव
प्रश्न 1. मोहनजोदड़ो के नगर नियोजन को वास्तुकला की भाषा में क्या कहा जाता है ?
क. ग्रिड प्लान
ख. रिंग प्लान
ग. लीनियर प्लान
घ. वर्टिकल प्लान
उत्तर: क. ग्रिड प्लान
प्रश्न 2. सिंधु घाटी सभ्यता को पुरातत्वविद मुख्य रूप से किस प्रकार की संस्कृति मानते हैं ?
क. पाषाण-संस्कृति
ख. जल-संस्कृति
ग. युद्ध-संस्कृति
घ. ताम्र-संस्कृति
उत्तर: ख. जल-संस्कृति
प्रश्न 3. मोहनजोदड़ो नगर के सबसे ऊंचे हिस्से (चबूतरे) को इतिहासकारों ने क्या नाम दिया है ?
क. निचला शहर
ख. कोठार
ग. गढ़
घ. अजायबघर
उत्तर: ग. गढ़
प्रश्न 4. लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता को किस प्रकार का समाज घोषित किया है ?
क. राज-पोषित
ख. धर्म-पोषित
ग. समाज-पोषित
घ. सेना-पोषित
उत्तर: ग. समाज-पोषित
प्रश्न 5. मोहनजोदड़ो के घरों की वास्तुकला की मुख्य विशेषता क्या थी ?
क. मुख्य द्वार बड़ी सड़क पर खुलना
ख. मुख्य द्वार पीछे की गलियों में खुलना
ग. घरों में खिड़कियों का न होना
घ. house बहुमंजिला होना
उत्तर: ख. मुख्य द्वार पीछे की गलियों में खुलना
प्रश्न 6. महाकुंड के फर्श और दीवारों को जल-रोधी बनाने के लिए किसका लेप किया गया था ?
क. पक्के सीमेंट का
ख. चिकनी मिट्टी का
ग. चूने और डामर का
घ. सफेद जस्ते का
उत्तर: ग. चूने और डामर का
प्रश्न 7. खुदाई में मिली 'दाढ़ी वाले नरेश' की मूर्ति किस पत्थर से निर्मित है ?
क. बलुआ पत्थर
ख. सेलखड़ी
ग. संगमरमर
घ. ग्रेनाइट
उत्तर: ख. सेलखड़ी
प्रश्न 8. सिंधु सभ्यता में कृषि के विकास का सबसे बड़ा साक्ष्य क्या है ?
क. खेतों के औजार
ख. विशाल कोठार (अनाज भंडार)
ग. नहरों के अवशेष
घ. बैलों की मूर्तियाँ
उत्तर: ख. विशाल कोठार (अनाज भंडार)
प्रश्न 9. लेखक ने मोहनजोदड़ो के खंडहरों की तुलना भारत के किस आधुनिक नियोजित शहर से की है ?
क. जयपुर
ख. चंडीगढ़
ग. नई दिल्ली
घ. गांधीनगर
उत्तर: ख. चंडीगढ़
प्रश्न 10. सभ्यता को 'लो-प्रोफाइल' कहने के पीछे लेखक का मुख्य तर्क क्या है ?
क. यहाँ के लोग बहुत गरीब थे
ख. यहाँ राजशाही ठाट-बाठ या भव्यता का प्रदर्शन नहीं था
ग. यहाँ व्यापार बहुत छोटा था
घ. यहाँ कोई कला मौजूद नहीं थी
उत्तर: ख. यहाँ राजशाही ठाट-बाठ या भव्यता का प्रदर्शन नहीं था
अतिलघुउत्तरात्मक प्रश्न - अतीत में दबे पाँव
प्रश्न 11. मोहनजोदड़ो की नगर नियोजन प्रणाली में 'ग्रिड प्लान' का क्या अर्थ है ?
उत्तर: ग्रिड प्लान का अर्थ है— ऐसी नगर व्यवस्था जहाँ सड़कें बिल्कुल सीधी हों और एक-दूसरे को समकोण (90 डिग्री) पर काटती हों।
प्रश्न 12. मोहनजोदड़ो की जल निकासी व्यवस्था को देखकर क्या सिद्ध होता है ?
उत्तर: इससे सिद्ध होता है कि 5000 साल पहले भी वहाँ के लोग नागरिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति बेहद जागरूक थे।
प्रश्न 13. सिंधु सभ्यता को 'हथियारविहीन' सभ्यता क्यों माना जाता है ?
उत्तर: क्योंकि पूरी खुदाई में कहीं भी राजशाही सेना, छावनी या युद्ध में इस्तेमाल होने वाले घातक हथियार नहीं मिले हैं।
प्रश्न 14. महाकुंड के पानी को स्वच्छ रखने के लिए क्या प्रबंध किया गया था ?
उत्तर: कुंड में पानी भरने के लिए पास में एक अलग कुआँ था और गंदे पानी की निकासी के लिए पक्की ढकी हुई नाली थी।
प्रश्न 15. पुरातत्व के क्षेत्र में 'डी. के. हलका' क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर: यह काशीनाथ दीक्षित के नाम पर खोजा गया नगर का सबसे समृद्ध क्षेत्र है, जहाँ प्रसिद्ध काँसे की नर्तकी की मूर्ति मिली थी।
प्रश्न 16. सिंधु सभ्यता के लोगों का 'सौंदर्यबोध' कैसा था ?
उत्तर: उनका सौंदर्यबोध राजसी दिखावे पर आधारित न होकर समाज-आधारित और पूरी तरह व्यावहारिक था।
प्रश्न 17. मोहनजोदड़ो में लगभग कितने कुएँ मिले हैं और यह क्या दर्शाते हैं ?
उत्तर: यहाँ लगभग 700 कुएँ मिले हैं, जो इसकी सुदृढ़ भूमिगत जल व्यवस्था और जल-संस्कृति को दर्शाते हैं।
प्रश्न 18. घरों की दीवारें मोटी या दोहरी क्यों बनाई जाती थीं ?
उत्तर: घरों को मौसम के प्रभाव (तेज गर्मी या ठंड) से बचाने और दूसरी मंजिल का भार संभालने के लिए दीवारें मोटी बनाई जाती थीं।
प्रश्न 19. लेखक ने मोहनजोदड़ो के अजायबघर को 'अमीर' क्यों कहा है ?
उत्तर: क्योंकि वहाँ सोने-चाँदी के गहने भले ही न हों, पर मानव इतिहास को समझाने वाली बेहद कीमती कलाकृतियाँ मौजूद हैं।
प्रश्न 20. वर्तमान में मोहनजोदड़ो की खुदाई को क्यों रोक दिया गया है ?
उत्तर: सिंधु नदी के पानी के रिसाव के कारण जमीन में क्षार और नमक की समस्या बढ़ गई है, जिससे खंडहर नष्ट हो रहे हैं।
निबंधात्मक प्रश्न और उत्तर - अतीत में दबे पाँव - ओम थानवी
प्रश्न 21. 'ग्रिड प्लान' क्या है ? मोहनजोदड़ो की सड़कों और टाउन प्लानिंग के आधार पर इसकी समीक्षा कीजिए।
उत्तर- 'ग्रिड प्लान' नगर नियोजन की वह सर्वश्रेष्ठ तकनीक है जिसमें पूरा शहर एक सुव्यवस्थित जाल की तरह बसाया जाता है। मोहनजोदड़ो इस ग्रिड प्रणाली का प्राचीनतम और सर्वोत्तम उदाहरण है।
यहाँ की मुख्य सड़कें बिल्कुल सीधी थीं, जो पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की तरफ जाती थीं और एक-दूसरे को 90 डिग्री (समकोण) पर काटती थीं। इससे पूरा नगर चौकोर खंडों में बंट जाता था। आज के आधुनिक नियोजित शहर जैसे चंडीगढ़, ब्रासीलिया या न्यूयार्क इसी ग्रिड प्लान पर आधारित हैं।
मुख्य सड़कों के बाद अंदर की बस्तियों में जाने के लिए तंग गलियाँ थीं, लेकिन वे भी पूरी तरह सीधी और नियोजित थीं। इस व्यवस्था से पूरे शहर में आवागमन और हवा का बहाव बहुत प्राकृतिक और सुलभ रहता था।
प्रश्न 22. "सिंधु घाटी सभ्यता एक जल-संस्कृति थी।" पाठ में मिले साक्ष्यों के आधार पर इस कथन को सिद्ध कीजिए।
उत्तर- लेखक ओम थानवी ने मोहनजोदड़ो को 'जल-संस्कृति' कहा है क्योंकि इतिहास में पानी का ऐसा कुशल और व्यापक प्रबंधन कहीं और नहीं मिलता। पूरे नगर की खुदाई में लगभग 700 कुएँ मिले हैं। हर तीसरे या चौथे घर के बाहर या अंदर एक कुआँ होता था, जिससे नागरिकों को शुद्ध पेयजल मिलता था।
यहाँ 40 फीट लंबा और 23 फीट चौड़ा एक विशाल सार्वजनिक स्नानागार मिला है, जिसका उपयोग सामूहिक या धार्मिक स्नान के लिए होता था। घरों के गंदे पानी को बाहर निकालने के लिए सड़कों के किनारे पक्की ईंटों की नालियाँ बनी थीं। ये नालियाँ ऊपर से पूरी तरह ढकी हुई थीं ताकि प्रदूषण न फैले।
हर छोटे-बड़े घर में एक निजी स्नानघर बना था, जिसका फर्श पक्की ईंटों से ढला हुआ था। यह सब प्रमाणित करता है कि यह सभ्यता पानी के महत्व और जनस्वास्थ्य को सबसे ऊपर रखती थी।
प्रश्न 23. सिंधु सभ्यता को 'साधन-संपन्न' लेकिन 'लो-प्रोफाइल' क्यों कहा गया है ? इसमें निहित सामाजिक संदेश को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - सिंधु सभ्यता के पास जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी आधुनिक साधन मौजूद थे, फिर भी लेखक ने इसे 'लो-प्रोफाइल' कहा है। इसके पीछे मुख्य कारण दिखावे का अभाव है। मिस्र या मेसोपोटामिया की सभ्यताओं में राजाओं को ईश्वर का रूप मानकर उनके बड़े-बड़े पिरामिड, सोने के मकबरे, विशाल महल या ऊँची मूर्तियाँ बनाई जाती थीं। इसके विपरीत, मोहनजोदड़ो में कोई भव्य राजमहल या बड़ा मंदिर नहीं मिला।
यहाँ जो शासक या 'नरेश' की मूर्ति मिली है, उसके सिर पर रखा मुकुट भी बहुत छोटा है। यहाँ की वास्तुकला में भव्यता के स्थान पर उपयोगिता को प्राथमिकता दी गई थी। यह हमें संदेश देता है कि एक महान समाज वह नहीं है जो राजाओं के अहंकार और महलों पर पैसा बहाए, बल्कि वह है जो आम जनता की बुनियादी सुविधाओं (जैसे रोटी, कपड़ा, मकान, पानी और स्वच्छता) को मजबूत करे।
प्रश्न 24. मोहनजोदड़ो की सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रकाश डालिए। लेखक के अनुसार यहाँ अनुशासन का आधार क्या था ?
उत्तर - 'अतीत में दबे पाँव' पाठ के अनुसार मोहनजोदड़ो का प्रशासन और समाज अत्यंत उन्नत and शांतिप्रिय था। यहाँ का समाज किसी क्रूर राजा या कट्टर धर्मगुरु के आदेशों से नहीं चलता था। यह एक समाज-पोषित व्यवस्था थी, जहाँ नागरिकों की भलाई मुख्य उद्देश्य थी।
खुदाई में कहीं भी राजसी सेना के बैरक, जेल या युद्ध के अस्त्र-शस्त्र नहीं मिले हैं। इससे पता चलता है कि यहाँ कभी कोई बड़ा युद्ध या आंतरिक विद्रोह नहीं हुआ। यहाँ जो अनुशासन दिखाई देता है (जैसे साफ नालियाँ, सीधी सड़कें, निश्चित आकार की ईंटें), उसका आधार कोई डर या उत्पीड़न नहीं था।
यहाँ के नागरिक खुद जिम्मेदार थे। वे अपनी नागरिक जिम्मेदारियों को समझते थे, इसलिए समाज बिना किसी बलप्रयोग के, आपसी तालमेल और आत्म-अनुशासन से चलता था।
प्रश्न 25. घरों की बनावट और गोपनीयता को लेकर सिंधु सभ्यता के लोगों की सोच कैसी थी ? विस्तार से समझाइए।
उत्तर - मोहनजोदड़ो के वास्तुकारों ने घरों का निर्माण करते समय नागरिकों की व्यक्तिगत गोपनीयता (निजता) का पूरा ध्यान रखा था। घरों के मुख्य प्रवेश द्वार कभी भी मुख्य और चौड़ी सड़कों पर नहीं खुलते थे। घर में घुसने के लिए व्यक्ति को मुख्य सड़क से मुड़कर पीछे की तंग गलियों में जाना पड़ता था।
इससे सड़क पर चलने वाले राहगीर सीधे घर के अंदर नहीं झांक सकते थे। सड़कों या गलियों की तरफ खुलने वाली दीवारों पर खिड़कियाँ नहीं बनाई जाती थीं। खिड़कियाँ और दरवाजे केवल घर के अंदर के खुले आंगन की तरफ खुलते थे। हर घर के केंद्र में एक खुला आंगन होता था।
रसोई, स्नानघर और अन्य कमरे इसी आंगन के चारों तरफ बने होते थे। घर की महिलाएँ और बच्चे आंगन में सुरक्षित और निजी रूप से अपने घरेलू कार्य कर सकते थे। यह वास्तुकला दर्शाता है कि वे लोग पारिवारिक निजता को बहुत महत्व देते थे।
RBSE कक्षा 12 हिंदी अनिवार्य (वितान भाग 2) ओम थानवी - अतीत में दबे पाँव अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1 सिंधु घाटी सभ्यता के दो मुख्य और सबसे बड़े शहर कौन से हैं ?
उत्तर मोहनजो-दड़ो और हड़प्पा
प्रश्न 2 लेखक ओम थानवी के अनुसार मोहनजो-दड़ो शहर की मुख्य विशेषता क्या थी ?
उत्तर यह प्राचीन काल का सबसे व्यवस्थित और नियोजित शहर था
प्रश्न 3 मोहनजो-दड़ो के सबसे ऊंचे चबूतरे पर क्या बना हुआ है ?
उत्तर बौद्ध स्तूप
प्रश्न 4 मोहनजो-दड़ो शहर में खेती और समृद्धि का मुख्य आधार क्या था ?
उत्तर सिंधु नदी का पानी और वहाँ की उपजाऊ मिट्टी
प्रश्न 5 खुदाई में मिले मोहनजो-दड़ो के विशाल कोठार (अन्नागार) का क्या उपयोग होता था ?
उत्तर टैक्स (कर) के रूप में मिले अनाज को सुरक्षित रखने के लिए
प्रश्न 6 सभ्यता के इस शहर में पानी की निकासी के लिए बनी नालियों की क्या विशेषता थी ?
उत्तर सभी नालियाँ पक्की ईंटों से बनी थीं और ऊपर से ढकी हुई थीं
प्रश्न 7 मोहनजो-दड़ो की खुदाई में लगभग कितने कुएँ प्राप्त हुए हैं जो उनकी जल-प्रबंधन कला को दिखाते हैं ?
उत्तर लगभग सात सौ कुएँ
प्रश्न 8 सिंधु घाटी सभ्यता को लेखक ने किस प्रकार की सभ्यता माना है ?
उत्तर लो-प्रोफाइल (सादगी प्रधान) और भव्यता से दूर सभ्यता
प्रश्न 9 मोहनजो-दड़ो से मिली 'नर्तकी' की प्रसिद्ध मूर्ति वर्तमान में कहाँ सुरक्षित रखी गई है ?
उत्तर दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में
प्रश्न 10 यह पाठ मुख्य रूप से गद्य की किस विधा के अंतर्गत आता है ?
उत्तर यात्रा-वृत्तांत और संस्मरण के अंतर्गत
एक पंक्ति वाले प्रश्नोत्तर -
प्रश्न 1 मोहनजो-दड़ो शब्द का वास्तविक और स्थानीय अर्थ क्या है ?
उत्तर इसका वास्तविक और स्थानीय अर्थ 'मुर्दों का टीला' होता है।
प्रश्न 2 इस प्राचीन शहर के मकानों की दीवारें इतनी मोटी और दोहरी क्यों बनाई गई थीं ?
उत्तर मकानों को गर्मी से बचाने और दोमंजिला इमारतों का भार संभालने के लिए दीवारें मोटी थीं।
प्रश्न 3 सिंधु घाटी सभ्यता में किस धातु के प्रयोग के सबसे प्राचीन साक्ष्य मिलते हैं ?
उत्तर इस सभ्यता में ताँबा और काँसा धातु के प्रयोग के सबसे प्राचीन साक्ष्य मिलते हैं।
प्रश्न 4 लेखक ने मोहनजो-दड़ो की सड़कों की तुलना आधुनिक भारत के किस योजनाबद्ध शहर से की है ?
उत्तर लेखक ने इसकी तुलना आधुनिक भारत के 'चंडीगढ़' शहर की ग्रिड-प्लानिंग सड़कों से की है।
प्रश्न 5 - सभ्यता के लोग अनाज पीसने के लिए किस उपकरण का प्रयोग करते थे ?
उत्तर - वे अनाज पीसने के लिए हाथ से चलने वाली पत्थर की चक्कियों का प्रयोग करते थे।
प्रश्न 6 - मोहनजो-दड़ो के अजायबघर (संग्रहालय) में रखी मुख्य वस्तुएँ कहाँ चली गईं ?
उत्तर - विभाजन के समय बहुत सी कीमती वस्तुएँ लंदन, दिल्ली और कराची के संग्रहालयों में चली गईं।
प्रश्न 7 - खुदाई में मिले विशाल स्नानागार (महाकुंड) की क्या मुख्य विशेषता थी ?
उत्तर - इसके तल में पक्की ईंटों और गंधक का प्रयोग किया गया था ताकि अशुद्ध पानी बाहर न रिस सके।
प्रश्न 8 - लेखक को मोहनजो-दड़ो की सूनी गलियों में घूमते समय राजस्थान के किस गाँव की याद आई ?
उत्तर - लेखक को जैसलमेर के कुलधरा नामक वीरान और शापित गाँव की याद आई।
प्रश्न 9 - सिंधु सभ्यता को 'खेतीहर और चरवाहा सभ्यता' क्यों कहा गया है ?
उत्तर - क्योंकि यहाँ के लोग बड़े पैमाने पर कपास, गेहूं और जौ की खेती करते थे तथा पशुपालन करते थे।
प्रश्न 10- मोहनजो-दड़ो शहर के नष्ट होने का पुरातत्वविदों ने क्या मुख्य अनुमान लगाया है ?
उत्तर सिंधु नदी में आई भयंकर बाढ़ या नदी का रास्ता बदल लेना इसका मुख्य कारण माना गया है।
महत्वपूर्ण दीर्घ एवं लघु उतरात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 'अतीत में दबे पाँव' पाठ के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता के जल-प्रबंधन और नगर-नियोजन की सार्थकता सिद्ध कीजिए ?
उत्तर सिंधु घाटी सभ्यता का नगर नियोजन और जल-प्रबंधन आज के आधुनिक शहरों से भी कहीं अधिक उन्नत था। मोहनजो-दड़ो शहर में सीधी और चौड़ी सड़कें थीं जो एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिसे ग्रिड-प्लानिंग कहा जाता है। शहर में पानी की निकासी के लिए पक्की ईंटों की ढकी हुई नालियाँ बनी थीं, जो सफ़ाई और स्वास्थ्य के प्रति उनकी जागरूकता को दिखाती हैं।
शहर में पानी की सुविधा के लिए लगभग सात सौ कुएँ खोदे गए थे। खुदाई में मिला महाकुंड (विशाल स्नानागार) सामूहिक स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए था, जिसमें साफ पानी भरने और गंदे पानी को बाहर निकालने की उचित व्यवस्था थी।
यह सब सिद्ध करता है कि पाँच हज़ार साल पहले भी वे लोग स्थापत्य कला और नागरिक सुविधाओं के मामले में अत्यंत परिपक्व थे।
प्रश्न 2 लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता को 'लो-प्रोफाइल' सभ्यता क्यों कहा है और यह मिस्र या मेसोपोटामिया की सभ्यताओं से किस प्रकार भिन्न थी ?
उत्तर लेखक ने सिंधु सभ्यता को लो-प्रोफाइल सभ्यता इसलिए कहा है क्योंकि यहाँ भव्यता और शक्ति का कोई अवांछित दिखावा नहीं मिलता। मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं में राजाओं के बड़े-बड़े पिरामिड, आलीशान महल, विशाल मंदिर और सोने-चाँदी के महँगे आभूषण मिले हैं जो राजसत्ता के घमंड को दिखाते हैं।
इसके विपरीत, मोहनजो-दड़ो की खुदाई में कोई बड़ा राजमहल, विशाल मंदिर या राजा की बड़ी मूर्तियाँ नहीं मिली हैं। यहाँ के औज़ार भी हथियार के रूप में नहीं बल्कि खेती और रोज़मर्रा के काम के लिए थे। नरेश (राजा) का मुकुट भी बहुत छोटा था।
यहाँ की हर वस्तु में कला और उपयोगिता का सुंदर समन्वय था, शक्ति का प्रदर्शन नहीं। इस सादगी और अनुशासन के कारण ही यह सभ्यता दूसरों से बिल्कुल अलग और श्रेष्ठ थी।
प्रश्न 3 'अतीत में दबे पाँव' पाठ के माध्यम से लेखक ने अतीत और वर्तमान के बीच किस प्रकार का संबंध जोड़ने का प्रयास किया है ?
उत्तर लेखक ने इस पाठ में अतीत के खंडहरों को केवल मृत अवशेष नहीं माना है, बल्कि उन्हें वर्तमान जीवन से जोड़ने का एक सुंदर माध्यम बनाया है। वे जब मोहनजो-दड़ो के घरों, रसोईघरों और गलियों में घूमते हैं, तो उन्हें लगता है कि अभी कोई देहाती औरत वहाँ से गुज़री होगी। वे वहाँ के सूत कातने और कपड़े बुनने की कला को आधुनिक काल के हथकरघा उद्योग से जोड़ते हैं।
सड़कों की बनावट को वे चंडीगढ़ और इस्लामाबाद जैसे शहरों की ग्रिड-प्लानिंग में देखते हैं। लेखक का मानना है कि जो सभ्यता पाँच हजार साल पहले इतनी अनुशासित और समृद्ध थी, उसी के संस्कार आज भी भारतीय समाज के खान-पान, कला और सादगी भरे जीवन में जीवित हैं। अतीत हमारे वर्तमान की नींव है, जिसे भूलना असंभव है।
प्रश्न 4 सिंधु घाटी सभ्यता के अजायबघर की दशा और खुदाई में मिली मुख्य वस्तुओं का संक्षिप्त विवरण दीजिए ?
उत्तर मोहनजो-दड़ो का अजायबघर किसी बड़े शहर के आधुनिक म्यूजियम जैसा भव्य नहीं है, बल्कि वह एक छोटे देहाती स्कूल जैसी इमारत में बना है। खुदाई में मिली पचास हज़ार वस्तुओं में से केवल कुछ चुनिंदा चीज़ें ही यहाँ रखी गई हैं।
इनमें मिट्टी के बर्तन, ताँबे और काँसे के औज़ार, मोहरें जिन पर पशुओं के चित्र अंकित हैं, नापने के बाट, खिलौना गाड़ियाँ, पाँसे, और रंग-बिरंगे पत्थरों के मनकों वाले हार मुख्य हैं। यहाँ सोने के गहने और सुप्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति की केवल परछाई या यादें ही शेष हैं क्योंकि वे अब बड़े शहरों के संग्रहालयों में भेज दी गई हैं।
यह अजायबघर हमें प्राचीन मानव के दैनिक जीवन, उनकी कलात्मक सोच और उनकी तकनीकी प्रगति का एक जीवंत ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदान करता है।