NCERT कक्षा 12 हिन्दी आलोक धन्वा पतंग । सम्पूर्ण नोट्स
कवि परिचय - आलोक धन्वा
नाम - आलोक धन्वा (जन्म - 1948, मुंगेर, बिहार)।
विशेषता - आलोक धन्वा समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि माने जाते हैं। आपने अपनी कविताओं में बाल मन की इच्छाओं और उनके सुंदर संसार का बहुत ही सजीव चित्रण किया है।
प्रमुख रचनाएँ - जनता का आदमी, भागी हुई लड़कियाँ, ब्रूनो की बेटियाँ, और इनका एकमात्र मुख्य काव्य संग्रह है— 'दुनिया रोज बनती है'।
भाषा -शैली - आपकी भाषा बहुत ही सरल, कोमल, और बिंबों (दृश्यों को उभारने वाली शैली) से सजी हुई शुद्ध खड़ी बोली हिंदी है।
नाम - आलोक धन्वा (जन्म - 1948, मुंगेर, बिहार)।
विशेषता - आलोक धन्वा समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि माने जाते हैं। आपने अपनी कविताओं में बाल मन की इच्छाओं और उनके सुंदर संसार का बहुत ही सजीव चित्रण किया है।
प्रमुख रचनाएँ - जनता का आदमी, भागी हुई लड़कियाँ, ब्रूनो की बेटियाँ, और इनका एकमात्र मुख्य काव्य संग्रह है— 'दुनिया रोज बनती है'।
भाषा -शैली - आपकी भाषा बहुत ही सरल, कोमल, और बिंबों (दृश्यों को उभारने वाली शैली) से सजी हुई शुद्ध खड़ी बोली हिंदी है।
आलोक धन्वा - पतंग कविता की सप्रसंग व्याख्या ( सभी 7 पद )
पद - सबसे तेज़ बौछारें गयीं भादों गया, --------- ।
सबसे तेज़ बौछारें गयीं भादों गया,
सवेरा हुआ!
खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा,
शरद आया पुलों को पार करते हुए
अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज़ चलाते हुए
घंटी बजाते हुए ज़ोर -ज़ोर से
प्रसंग - प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के 'पतंग' पाठ से ली गई हैं। इसके रचयिता कवि आलोक धन्वा हैं। इसमें कवि ने बरसात के मौसम के बीत जाने के बाद शरद ऋतु के आगमन का बहुत सुंदर वर्णन किया है।
व्याख्या - कवि कहते हैं कि तेज बारिश का मौसम (सावन और भादों का महीना) बीत चुका है। अब चारों तरफ फैली हुई उदासी खत्म हो गई है और एक नया सवेरा हुआ है। यह सवेरा खरगोश की लाल आँखों की तरह चमकीला और सुंदर दिखाई दे रहा है।
ऐसा लगता है मानो शरद ऋतु (सर्दी का मौसम) अपनी नई और चमकीली साइकिल को तेज चलाते हुए, जोर -जोर से घंटी बजाते हुए सभी बाधाओं (पुलों) को पार करके आ गया है। चारों तरफ उत्साह का माहौल है।
विशेष - ऋतु परिवर्तन का बहुत ही सुंदर मानवीकरण किया गया है (शरद ऋतु को एक बच्चे की तरह दिखाया गया है)।
'लाल सवेरा' और 'चमकीली साइकिल' जैसे शब्दों से सुंदर दृश्य सामने आता है।
'ज़ोर -ज़ोर' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
ऋतु परिवर्तन का बहुत ही सुंदर मानवीकरण किया गया है (शरद ऋतु को एक बच्चे की तरह दिखाया गया है)।
'लाल सवेरा' और 'चमकीली साइकिल' जैसे शब्दों से सुंदर दृश्य सामने आता है।
'ज़ोर -ज़ोर' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
काव्यांश - चमकीले इशारों से बुलाते हुए ................. ।
चमकीले इशारों से बुलाते हुए
पतंग उड़ाने वाले बच्चों के झुंड को
चमकीले इशारों से बुलाते हुए और
आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए
कि पतंग ऊपर उठ सके
दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज़ उड़ सके
प्रसंग - इन पंक्तियों में कवि ने शरद ऋतु द्वारा बच्चों को पतंग उड़ाने के लिए आमंत्रित करने का वर्णन किया है।
व्याख्या - कवि कहते हैं कि शरद ऋतु अपनी धूप की चमक से पतंग उड़ाने वाले बच्चों के समूहों को इशारे करके बुला रही है। उसने आसमान को बिल्कुल साफ, कोमल और मुलायम बना दिया है, ताकि हवा सही चले और बच्चों की पतंग आसानी से ऊपर आकाश में उड़ सके।
बच्चे दुनिया की सबसे हल्की, रंगीन और कागज की बनी इस चीज़ (पतंग) को आसमान की ऊंचाइयों तक पहुँचा सकें।
विशेष -
बच्चों के उत्साह और पतंग की कोमलता को दर्शाया गया है।
भाषा बहुत ही कोमल और प्रवाहमयी है।
बच्चों के उत्साह और पतंग की कोमलता को दर्शाया गया है।
भाषा बहुत ही कोमल और प्रवाहमयी है।
काव्यांश - दुनिया का सबसे पतला कागज़ उड़ सके ---------- ।
दुनिया का सबसे पतला कागज़ उड़ सके
बाँस की सबसे पतली कमानी उड़ सके
कि शुरू हो सके सीटी -किलकारियों और
तितलियों की इतनी नाज़ुक दुनिया
प्रसंग - इसमें कवि ने पतंग उड़ने पर बच्चों की खुशी और उनके सुंदर संसार को प्रकट किया है।
व्याख्या - शरद ऋतु ने ऐसा माहौल बना दिया है कि दुनिया का सबसे पतला कागज और बाँस की सबसे पतली लकड़ी (कमानी) से बनी पतंग आसमान को छू सके।
जैसे ही बच्चों की पतंगें आसमान में उड़ने लगती हैं, वैसे ही चारों तरफ बच्चों की सीटियों और खुशी की किलकारियों की आवाजें गूँजने लगती हैं। आसमान में उड़ती रंग -बिरंगी पतंगें ऐसी लगती हैं, मानो चारों तरफ सुंदर और नाजुक तितलियों का संसार फैल गया हो।
विशेष -
रंग -बिरंगी पतंगों की तुलना तितलियों से की गई है।
बाल मन की मासूमियत का सजीव चित्रण है।
रंग -बिरंगी पतंगों की तुलना तितलियों से की गई है।
बाल मन की मासूमियत का सजीव चित्रण है।
काव्यांश - जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास ------------- ।
जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास
पृथ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास
जब वे दौड़ते हैं बेसुध
छतों को भी मुलायम बनाते हुए
दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए ।
प्रसंग - इस अंश में बच्चों की कोमलता, उनके लचीले शरीर और उनके खेलने के उत्साह का वर्णन है।
व्याख्या - कवि कहते हैं कि बच्चे अपने जन्म से ही बहुत कोमल होते हैं, मानो वे अपने साथ रुई (कपास) जैसी कोमलता लेकर पैदा हुए हों। उनका शरीर इतना हल्का और लचीला होता है कि वे चोट सह लेते हैं। जब वे पतंग के पीछे बेसुध (खोए हुए) होकर छतों पर दौड़ते हैं, तो उनके पैरों की कोमलता से कठोर छतें भी मुलायम महसूस होने लगती हैं।
उनके दौड़ने की आवाज़ से ऐसा लगता है मानो सभी दिशाओं में ढोल (मृदंग) बज रहे हों। उनके पैरों की गति को देखकर ऐसा लगता है जैसे पूरी धरती खुद उनके बेचैन पैरों के पास घूमती हुई आ रही है।
विशेष - - कपास' शब्द से बच्चों की मासूमियत और कोमलता को दर्शाया गया है।qw
- बच्चों की ऊर्जा का बहुत ही अनोखा और सुंदर चित्रण है।
काव्यांश - जब वे पेंग भरते हुए चले आते हैं ---------------------।
जब वे पेंग भरते हुए चले आते हैं
डाल की तरह लचीले वेग से अकसर
छतों के ख़तरनाक किनारों तक
उस समय गिरने से बचाता है उन्हें
सिर्फ़ उनके ही रोमांचित शरीर का संगीत ।
प्रसंग - इन पंक्तियों में बच्चों के साहस और उनके शरीर के संतुलन को दिखाया गया है।
व्याख्या - कवि कहते हैं कि जब बच्चे झूला झूलने की तरह आगे -पीछे कदम बढ़ाते हुए दौड़ते हैं, तो उनका शरीर किसी पेड़ की लचीली डाल की तरह मुड़ जाता है। पतंग उड़ाते -उड़ाते वे अक्सर छतों के सबसे खतरनाक किनारों तक पहुँच जाते हैं।
उस ऊँचाई और खतरे से उन्हें कोई दूसरा नहीं बचाता, बल्कि उनके अंदर का रोमांच, उत्साह और उनके शरीर का अनोखा संतुलन (संगीत) ही उन्हें नीचे गिरने से सुरक्षित बचा लेता है ।
विशेष -
'डाल की तरह लचीले वेग से' में उपमा अलंकार है।
बच्चों के साहस और एकाग्रता को सुंदर ढंग से उभारा गया है।
'डाल की तरह लचीले वेग से' में उपमा अलंकार है।
बच्चों के साहस और एकाग्रता को सुंदर ढंग से उभारा गया है।
काव्यांश - पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ उन्हें थाम लेती हैं एक धागे के सहारे--------- ।
पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ उन्हें थाम लेती हैं एक धागे के सहारे
पतंगों के साथ -साथ वे भी उड़ रहे हैं
अपने रंध्रों के सहारे
प्रसंग - इसमें पतंग और बच्चों के बीच के गहरे जुड़ाव को प्रकट किया गया है ।
व्याख्या - कवि कहते हैं कि आसमान में बहुत ऊँचाई पर उड़ती हुई पतंगों की धड़कनें बच्चों को केवल एक पतले से धागे के सहारे थामे रखती हैं। ऐसा लगता है कि पतंग सिर्फ खुद नहीं उड़ रही है, लेकिन उस पतंग को उड़ाने वाले बच्चे भी अपने शरीर के रोम -छिद्रों (रंध्रों) से निकलने वाले उत्साह के सहारे खुद भी आसमान में पतंग के साथ -साथ उड़ रहे हैं। वे पूरी तरह पतंग में खो चुके हैं।
विशेष -
बाल मन की कल्पनाशीलता को बहुत ही गहराई से व्यक्त किया गया है।
भाषा अत्यंत सरल और भावपूर्ण है।
बाल मन की कल्पनाशीलता को बहुत ही गहराई से व्यक्त किया गया है।
भाषा अत्यंत सरल और भावपूर्ण है।
